अष्टांग योग और आयुर्वेद रिट्रीट
योग और आयुर्वेद शरीर और मन दोनों की शुद्धि के लिए एक आदर्श संयोजन हैं, जो व्यक्ति को यह पहचानने में मदद करते हैं कि जीवन में वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है और क्या नहीं। भारत योग की जन्मभूमि है और भक्ति व ध्यान की प्रेरणा का स्रोत है। उस स्थान पर योग करना, जहाँ अनगिनत योगियों ने अपने अभ्यास को आकार दिया है, एक गहरे आध्यात्मिक स्रोत से जुड़ने जैसा है।
इन दो सप्ताहों में हम अपनी नाड़ी और जैविक लय, भावनाओं, स्वप्नों और पाचन के प्रति सजग होकर अपनी आंतरिक शांति पाने और अपनी विशिष्ट लय को पहचानने पर ध्यान केंद्रित करेंगे, और साथ ही शारीरिक लय, विचारों और भावनाओं के बदलते स्वरूपों के प्रति स्वयं को संवेदनशील होने देंगे।
विशिष्ट आहार व्यवस्था और दैनिक आयुर्वेदिक देखभाल प्रत्येक प्रकृति (शारीरिक संरचना) की आवश्यकताओं के अनुरूप होती है। शांतिदायक मालिश और तेल थेरेपी के माध्यम से इंद्रियाँ दैनिक दिनचर्या से विश्राम पा सकती हैं। शांत वातावरण में होने वाला दैनिक योग और ध्यान सत्र आपको ठहरने, भीतर की ओर ध्यान केंद्रित करने और अपने वास्तविक स्वरूप से फिर से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।
योग समय-सारणी
शुरुआती और उन्नत दोनों प्रकार के विद्यार्थी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। हम प्रतिदिन अभ्यास करते हैं। साप्ताहिक पाठ्यक्रम शनिवार (परिचय और स्वागत) से शुक्रवार शाम तक चलते हैं।
दैनिक समय-सारणी
- 07.00 am से 08:00 am – अष्टांग योग
- 08:00 am से 09:00 am – नाश्ता
- 09:30 am से 12:30 pm – आयुर्वेदिक मालिश और उपचार (प्रति व्यक्ति 1 घंटे का स्लॉट)
- 12.30 pm से 1.30 pm – दोपहर का भोजन
- 1:30 pm से 5:30 pm – खाली समय / दूसरी आयुर्वेदिक मालिश
- 6:00 pm से 7:00 pm – ध्यान / प्राणायाम
- 7:00 pm से 8.00 pm – रात का भोजन
*आगमन पर समय में परिवर्तन हो सकता है*
पैकेज में शामिल:
परिसर की सभी सुविधाओं का पूरा उपयोग, जिनमें स्विमिंग पूल, जिम, पुस्तकालय और ध्यान कक्ष शामिल हैं।
सुबह की कक्षाएँ
सुबह के अष्टांग योग सत्र सौम्य ढंग से संचालित किए जाएँगे। हम श्वास पर ध्यान केंद्रित करेंगे – श्वास के साथ प्रवाहित होंगे। गति और श्वास एक नृत्य जैसी, एक रचनात्मक प्रक्रिया जैसी हैं, जो हमें हमारे अस्तित्व के सार तक ले जाती है, जहाँ हम अपने भीतर और अपने आसपास की समस्त सृष्टि के बीच शांति, मुक्ति और स्थिरता का अनुभव करते हैं।
दोपहर की कक्षाएँ
दोपहर का पाठ दो विषय-क्षेत्रों में बँटा है।
पहला क्षेत्र: हमारा ज़ोर ध्यान या मौन में स्थिर रहने पर होगा। मौन में रहने से आत्म-चिंतन की क्षमता बढ़ती है, जिससे आप उठने वाले विचारों, भावनाओं और इच्छाओं को तुरंत प्रतिक्रिया दिए बिना देख पाते हैं। सप्ताह में तीन बार हम हृदय चक्र, मणिपुर (सोलर प्लेक्सस) चक्र और मूलाधार चक्र पर केंद्रित निर्देशित ध्यान कराएँगे।
दूसरा क्षेत्र: प्राणायाम, अर्थात श्वास-नियंत्रण का विधिवत अभ्यास, हमारी मूल जीवन-ऊर्जा का स्रोत है। हम प्राणायाम अभ्यासों, श्वास विधियों और दिनचर्याओं के अभ्यास पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
1 उपचार पैकेज में शामिल है: प्रतिदिन एक आयुर्वेदिक मालिश, Abhyangam (अभ्यंगम)
2 उपचार पैकेज में शामिल है: एक Abhyangam (अभ्यंगम) और डॉक्टर के परामर्श के अनुसार एक अतिरिक्त आयुर्वेदिक उपचार (जैसे शिरोधारा, पिषिचिल, हर्बल स्क्रब आदि)

