पंचकर्म: तैयारी और प्रक्रियाएँ

पंचकर्म का अर्थ है पाँच आयुर्वेदिक प्रक्रियाएँ। यह पेज आयुर्वेदिक अभ्यास में वर्णित तैयारी, उपचार और अनुवर्ती देखभाल के चरणों का परिचय देता है।
यहाँ वर्णित पाँच प्रक्रियाएँ हैं: वमन (उल्टी), विरेचन (रेचन), निरूहवस्ति (काढ़े का एनीमा), नस्य (नाक के माध्यम से औषधि देना) और अनुवासनवस्ति (तेल का एनीमा)। चरण हैं: पूर्व (तैयारी), प्रधान (उपचार) और पश्चात (अनुवर्ती देखभाल)।

यहाँ वर्णित तैयारी संबंधी थेरेपी में शामिल हैं अभ्यंगम्, शिरोधारा और इलाकिझी। आयुर्वेदिक डॉक्टर आकलन करते हैं कि व्यक्ति के लिए कौन-सी थेरेपी और प्रक्रियाएँ उपयुक्त हैं।
आयुर्वेद में, पंचकर्म की चर्चा ‘आम’ की पारंपरिक अवधारणा के संदर्भ में की जाती है। आपके चिकित्सक सलाह देंगे कि यह दृष्टिकोण आपके लिए उपयुक्त है या नहीं।
हम कहाँ हैं
Kairali दक्षिण-पश्चिम भारत में, केरल के भीतरी भाग के पालक्काड ज़िले में स्थित है।




- NABH प्रमाणित अस्पताल
- 118+ वर्षों की विरासत
- व्यक्तिगत कार्यक्रम
- World Luxury Award विजेता
पक्का नहीं कि कौन-सा कार्यक्रम आपके लिए उपयुक्त है?
अपना लक्ष्य अपने शब्दों में बताइए — रोगी देखभाल टीम या कोई आयुर्वेदिक डॉक्टर आपको सही कार्यक्रम की ओर मार्गदर्शन करेंगे।
